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उत्तराखंडः 300 मेगावाट के प्रोजेक्ट की राह आसान

ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 05 Feb 2015 11:40 AM IST
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राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्यों के बफर जोन में आ रही 300 मेगावाट की बावला नंद प्रयाग परियोजना से संशय के बादल छंटने लगे हैं।
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बफर जोन जल्द से जल्द होंगे चिन्हित
बुधवार को मुख्य सचिव एन रविशंकर की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूरी तरह से तस्वीर साफ नहीं हो पाई, लेकिन इस बात पर सहमति बनी कि बफर जोन जल्द से जल्द चिन्हित किए जाएं। बैठक में प्रमुख सचिव वन और प्रमुख वन संरक्षक नहीं पहुंच पाए। ये दोनों ही पल्लवगढ़ में हो रहे बर्ड वाचिंग फेस्टिवल में शामिल होने के लिए गए हुए थे।

बैठक में अस्कोट वन्य जीव अभयारण्य की 230 मेगावाट की सेला उर्थिंग, गोविंद पशु विहार की 140 मेगावाट की तालुका सांकरी, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क की 70 मेगावाट की ऋषिगंगा-1, 35 मेगावाट की ऋषिगंगा-2 और केदारनाथ वन्य जीव अभयारण्य में 300 मेगावाट की बावला नंद प्रयाग परियोजना पर बात हुई।
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ये सभी परियोजनाएं बफर जोन में हैं और सीमाकंन के बाद ही इन पर तस्वीर साफ हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक बावला नंद प्रयाग पर काम शुरू करने के लिए जल विद्युत ऊर्जा निगम को हरी झंडी मिलने की संभावना बनी है।

कहा गया कि यह परियोजना बफर जोन में हैं पर इससे अभयारण्य प्रभावित नहीं होता। जल विद्युत ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा ने सीमांकन जल्द से जल्द पूरा करने का आग्रह किया।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश में स्पष्ट है कि अभयारण्यों के चारों ओर का संवेदी क्षेत्र बफर जोन के रूप में विकसित किया जाना है। यह स्पष्ट है कि अगर प्रदेश की ओर से बफर जोन घोषित नहीं किया जाता तो अभयारण्य के चारों ओर का 10 किलोमीटर का क्षेत्र संवेदी जोन मान लिया जाएगा। अगर प्रदेश सरकार चाहे तो प्रभाव के आधार पर बफर जोन को 10 किलोमीटर से कम भी कर सकती है।

मुख्य सचिव ने वन विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द सीमांकन करने का निर्देश दिया। सूत्रों के मुताबिक सीमांकन के बाद ही यह तय हो पाएगा कि बाकी परियोजनाओं पर स्थिति क्या होगी। बैठक में प्रमुख सचिव वन और प्रमुख वन संरक्षक के मौजूद न होने से इस मामले में अधिक बात नहीं हो पाई।

बफर जोन या संवेदी क्षेत्र
बफर जोन या संवेदी क्षेत्र की परिकल्पना वन अभयारण्य या राष्ट्रीय पार्क के चारों ओर के ऐसे क्षेत्र से है जो शॉक ऑर्ब्जवर का काम करें। प्रदेश सरकार चाहे तो इस क्षेत्र को उपयोग और प्रभाव के आधार पर कम या ज्यादा भी कर सकती है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि बफर जोन प्रतिबंधित क्षेत्र न होकर नियामक क्षेत्र होगा।

इसमें कुछ खास गतिविधियां हैं जो प्रतिबंधित हैं। जैसे बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं को इन क्षेत्रों में पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया गया है। इसी तरह रात में यातायात, हार्न के प्रयोग पर रोक लगाई गई है। खनन आदि सिर्फ स्थानीय जरूरत और दैनिक उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया है।
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