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मुहावरे गढ़ रहा है टमाटर

अरविंद तिवारी Updated Tue, 29 Jul 2014 07:43 PM IST
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कहते हैं, टमाटर पानीदार होता है। टमाटर खाने वाले का चेहरा दिपदिपाता रहता है, बशर्ते वह पिलपिले टमाटर न खा रहा हो। टमाटर में एंटीऑक्सिडेंट होता है, जो तमाम तरह के रोगों से बचाता है। मैंने आम आदमी से कहा, भैया, टमाटर से ऐसी बेरुखी ठीक नहीं। टमाटर आपके कोलस्ट्रॉल को कम करता है तथा हृदय की धमनियों को हाई स्पीड ट्रेन की तरह चलाता है!
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मुझे हिकारत से देखता हुआ वह बोला, कोलस्ट्रॉल पैदा करने वाली सभी वस्तुएं, मेरी पहुंच से परे हैं, इसलिए अपनी सलाह किसी खाते-पीते परिवार को दो। खाता-पीता परिवार टमाटर का भरपूर उपयोग कर रहा है, बल्कि यों कह सकते हैं कि उसी की वजह से टमाटर महंगा है।

मैंने एक डॉक्टर से टमाटरजन्य बीमारियों के बारे में पूछा, तो उसने टमाटर की पूरी जन्मकुंडली खोलकर रख दी। जिसका सार है कि टमाटर बहुत उपयोगी होता है। ज्यादा खाने पर पथरी हो जाती है, जो आजकल मामूली बीमारी बनकर रह गई है। हमारी सरकार तंबाकू उत्पादों की तरह ‘टमाटर जानलेवा है’ का स्लोगन भी नहीं लगा सकती। टमाटर ने आम आदमी के साथ सरकार को भी सांसत में डाल दिया है!
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बहरहाल, टमाटर आजकल नए मुहावरे गढ़ रहा है। एक साहित्यकार बोले, मैं साहित्य की मंडी का टमाटर हूं। मैंने कहा, टमाटर सड़े भी तो निकलते हैं। वह पलटकर बोले, सड़ा टमाटर भी चालीस रुपये किलो बिक रहा है। मुझे लगा, मेरी हैसियत सड़े टमाटर जैसी भी नहीं है। शहर के कहवा क्लब में जब मैंने कहा, इस बार का साहित्य अकादेमी पुरस्कार मुझे मिलेगा, तो एक मित्र तपाक से बोले, यह मुंह और टमाटर की सब्जी। 'अंगूर खट्टे हैं' के स्थान पर आजकल 'टमाटर खट्टे हैं' कहा जाने लगा है।

'आप तो ईद का चांद हो गए हैं' के स्थान पर 'आप तो किचन के टमाटर हो गए हैं' कहा जाता है। पति अपनी पत्नी से कहता है, आजकल तुम टमाटर की तरह नखरे दिखाने लगी हो! भिखारी की कटोरी में पांच रुपये का सिक्का डालने पर वह कहता है, भगवान आपकी रसोई टमाटर से भर दे। यहां से नौ-दो-ग्यारह हो जाओ के स्थान पर कहा जाता है कि यहां से टमाटर हो जाओ। मित्र कहता है, भाई साहब, घर में दाल-रोटी की कोई कमी नहीं है, मगर टमाटर की उम्मीद मत करना।

आजकल टमाटर आम बोलचाल की भाषा बदलने के साथ-साथ सियासत की भाषा भी बदल रहा है। सेव और टमाटर की प्रतिस्पर्द्धा सब्जी मंडी से चलकर संसद तक पहुंच गई है।
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