छत्तीसगढ़ में कानागांव में भले ही नक्सलियों और सुरक्षा बलों में मुठभेड़ चली हो, लेकिन लोगों ने आतंक की परवाह किए बिना अच्छी खासी वोटिंग की है।
भाजपा ने 2008 के पिछले चुनाव में बस्तर की 12 में से 11 सीटें जीती थीं। पहले चरण की 18 सीटों पर अच्छा मतदान हुआ है, लेकिन यह 2008 के मुकाबले कम है।
एक सवाल यह खड़ा हुआ है कि क्या इस मतदान को रमनसिंह सरकार के खिलाफ माना जाए।
अच्छे मतदान का भ्रम
बस्तर की 12 सीटों पर पहले चरण के मतदान का प्रतिशत अच्छा रहा है। अंतागढ़ (70), मोहला मानपुर (70), बस्तर (60), भानुप्रतापपुर (60), जगदलपुर (67), केशकाल (65), दंतेवाड़ा (45), बीजापुर (50), नारायणपुर (32), कोंटा (40), कोंडागांव (65) फीसदी मतदान रहा है।
किंतु यह ध्यान रखना चाहिए कि 2008 में बस्तर और राजनांदगांव के इलाके की 18 सीटों पर मतदान इस बार से भी ज्यादा हुआ था। वहां मतदान का प्रतिशत 78-79 फीसदी तक हुआ था।
जैसे कोंडागांव में पिछली बार 79.22 फीसदी मतदान हुआ था और इस बार 65 फीसदी हुआ है। बस्तर में 2008 में मतदान करीब 74 फीसदी रहा था, इस बार वह करीब 60 फीसदी पर आ गया है।
इस बार बस्तर की 12 सीटों पर मतदान 3 बजे बंद हो गया था। इसी तरह राजनांदगांव की 6 सीटों में से 1 पर मतदान 3 बजे बंद हो गया था। शेष पांच सीटों पर शाम पांच बजे तक मतदान हुआ।
अर्थात इस बार का मतदान 2008 के मुकाबले कम है। लेकिन छत्तीसगढ़ की राजनीति के पर्यवेक्षक ज्यादा वास्तविक मतदान मान रहे हैं।
फोर्स का फैक्टर
नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कम से कम दो बड़े असर हुए हैं। एक, नक्सली कोई बड़ी हिंसा नहीं कर पाए।
उसके कारण मतदाताओं का मनोबल बढ़ा और दोपहर 12 बजे के बाद मतदान करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी। नक्सलग्रस्त इलाकों में भी 12 से 3 बजे के दौरान अच्छा खासा मतदान हुआ।
दो, सुरक्षा बलों की उपस्थिति का दूसरा असर यह हुआ है कि फर्जी मतदान नहीं हो पाया। पिछली बार मतदान के आंकड़े जिस तरह के आए थे, उसे लेकर पर्यवेक्षकों ने आशंकाएं व्यक्त की थीं। इस बार मतदान को वास्तविक माना जा रहा है।
क्या होंगे नतीजे
बस्तर में भाजपा ने 2008 में 12 में से 11 सीटें जीती थीं। इस बार वास्तविक मतदान का असर भाजपा के नतीजों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस ने सामू कश्यप को टिकट देकर महारा क्रिश्चियन जाति पर लक्ष्य साधा है, जिसका असर पूरे बस्तर में दिखाई देगा। एक अनुमान व्यक्त किया जा रहा है कि कांग्रेस को इस बार बस्तर में कम से कम 6-7 सीटें जीतने में मदद मिल सकती है।
राजनांदगांव में भी कांग्रेस कम से कम 2-3 सीटों पर विजय हासिल कर सकती है।