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महिलाएं बोली, ओपीडी खुलवाओ नहीं तो धरना

ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 22 Feb 2014 03:20 PM IST
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सेक्टर 22 स्थित कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में बंद हुई सात ओपीडी को खुलवाने के लिए स्थानीय महिलाएं एकजुट हो गई हैं।
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नेहरू पार्क में बैठक कर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को चेतावनी दी कि यदि बंद ओपीडी जल्द नहीं खुलवाई गई तो वे सेक्टर-16 स्थित जनरल हास्पिटल के बाहर धरना देंगी। ओपीडी बंद होने से स्थानीय महिलाओं की परेशानी बढ़ गई हैं।

उनका कहना है कि पहले वे दस मिनट के अंदर अपनी दवाई ले आती थीं, लेकिन अब उन्हें जनरल हास्पिटल जाने के लिए कई बार सोचना पड़ता है। जनरल हास्पिटल न जाकर लोग प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिक में अपना इलाज करवा रहे हैं।
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इससे उन्हें ज्यादा रुपया खर्च करना पड़ रहा है। उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन से अपील की है कि वे ओपीडी के बारे में एक बार फिर से सोचे और अपने फैसले को बदले।

क्या कहना है महिलाओं का
-जब डिस्पेंसरी में ओपीडी चल रही थी, तब आसानी से पूरी फैमिली को डॉक्टर को दिखा देते थे। अब प्राइवेट क्लीनिक में ही दिखा रहे हैं। लेकिन प्राइवेट में काफी पैसा लिया जा रहा है।
संतोष कुमार, गृहणी, सेक्टर 22

-बुजुर्ग महिला सेक्टर-16 के जनरल हास्पिटल नहीं जा सकती। घुटनों में काफी दर्द होता है। पहले सब कुछ आसान था। पता नहीं प्रशासन ने ऐसा फैसला क्यों लिया?
कांता देवी, गृहणी सेक्टर 22

-यह डिस्पेंसरी सबसे ज्यादा पुरानी है और लोग भी यहां सबसे अधिक है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग का यह फैसला समझ में नहीं आता। कुल मिलाकर हम सभी बहुत ज्यादा परेशान हो रहे हैं।
पूनम, गृहणी सेक्टर 22

- हर सेक्टर में डिस्पेंसरी है। जहां नहीं है, वहां पर बनाने की योजना चल रही है। ऐसे में बसी बसाई डिस्पेंसरी की ओपीडी क्यों उजाड़ी जा रही है? यहां पर आसानी से चली जाती थी, अब मोहाली के अस्पताल में दिखा रही हूं।
सरोज, गृहणी सेक्टर 22

- पीजीआई, जीएमसीएच-32 और जनरल हास्पिटल में जाने से अच्छा है कि प्राइवेट क्लीनिक में ही इलाज करवाएं। इन संस्थानों में इतनी भीड़ है कि सीनियर सिटीजन और महिलाओं को दिखा पाना काफी मुश्किल होता है।
सरोज, गृहणी, सेक्टर 22

- डिस्पेंसरी की ओपीडी तो हर सेक्टर की मुख्य आवश्यकता होती है। जब यही नहीं है तो चंडीगढ़ के स्वास्थ्य विभाग के क्या मायने हैं? बड़े अस्पताल में बड़ी बीमारी के ही इलाज होते हैं।
लता, गृहणी, सेक्टर 22
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