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बोर्ड रिजल्ट: फरीदाबाद ने किया शर्मसार, 43.91 फीसदी अंक के साथ मेवात से भी पिछड़ा

ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 19 May 2016 01:42 AM IST

सार

  • 12,717 विद्यार्थियों में से 5584 को मिली सफलता
  • 4093 बच्चों की रि-अपीयर
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विस्तार
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हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के तहत बुधवार को आए नतीजों ने एक बार फिर फरीदाबाद को शर्मसार कर दिया। जिले के 12717 विद्यार्थियों में से महज 5584 ही पास हो सके। वहीं, इस बार 4093 विद्यार्थियों की रि-अपीयर आई है। खराब नतीजों में जिले ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
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यूं तो मेवात को पिछड़ा जिला माना जाता है लेकिन फरीदाबाद 43.91 फीसदी अंकों के साथ इस जिले से भी पिछड़ गया। खराब परिणाम ने एक बार फिर जिले की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्मार्ट सिटी में शुमार फरीदाबाद के शिक्षा स्तर को ऊंचा उठाने के लिए शिक्षा विभाग तरह-तरह के दावे कर रहा है लेकिन जिले में बोर्ड का परिणाम लगातार गिर रहा है।

सुविधाएं नहीं, कैसे पढ़ें बच्चे

परीक्षा परिणाम ने जिले के शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। प्रदेश के सबसे निचले पायदाने पर पहुंचे जिले के खराब परिणाम के लिए शिक्षकों की कमी, अपर्याप्त संसाधन और स्लम बस्तियों को जिम्मेदार माना जा रहा है। जिले में 50 सरकारी और 65 गैर सरकारी स्कूल है।
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आंकड़ों पर ध्यान दें तो अधिकांश सरकारी स्कूलों में जिले के 63 बस्तियां के बच्चे पढ़ाई करते है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार फरीदाबाद में करीब दो लाख से ज्यादा आबादी है।

बुनियादी जरूरतों के लिए तरसने वाले इन स्लमों में लोगों को बुनियादी सुविधाएं न मिलना भी खराब रिजल्ट की वजह बताई जा रही है। सराय, गौंच्छी, बल्लभगढ़, सारन जैसे बड़े स्कूलों में पांच से सात हजार बच्चे पढ़ाई करते है।

स्कूलों में शिक्षकों की कमी

आंकड़ों पर ध्यान दें तो जिले के 50 सरकारी स्कूलों में सौ से ज्यादा पदों पर शिक्षक नहीं है। सबसे बुरा हाल एनएच-5 स्थित, गवर्नमेंट ब्वायज सीनियर सेकंडरी स्कूल, एनएच-दो गवर्नमेंट हाईस्कूल, तिकोना पार्क, मेवला महाराजपुर, ओल्ड गल्र्स ब्वायज, मेट्रो, बल्लभगढ़ में है।

जहां शिक्षकों की भारी कमी है। यहां एक-एक क्लास में 125-125 बच्चे है। जबकि शिक्षा के अधिकार के मुताबिक 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। शहर के ऐसे कई स्कूल हैं, जहां कमरे कम व छात्र संख्या ज्यादा है। इस कारण बच्चों को बिना कमरे के यानी खुले में पढ़ाया जाता है।

इसका असर शैक्षणिक व्यवस्था पर पडना लाजमी है। शिक्षकों की कमी के चलते स्कूलों में पढ़ाई बाधित हो रही है। इसके अलावा साल में कई दिन शिक्षकों की ड्यूटी गैर शैक्षणिक कार्य में लगाया जाना भी खराब रिजल्ट की वजह बना है। हरियाण स्कूल लेक्चरर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रामवीर शर्मा के अनुसार शिक्षकों सरकार को शिक्षकों की कमी को पूरा करना चाहिए। 

शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए नई सरकार ने परीक्षाओं में सख्ती बरती है, जिसका असर परीक्षा परिणाम में दिखा है। पिछली सरकार के कार्यकाल में परीक्षाओं में नकल हावी रहती थी। जिले का परीक्षा परिणाम खराब आना चिंता का विषय है। इसे सुधारने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। -सीमा त्रिखा, मुख्य संसदीय सचिव (शिक्षा एवं पर्यटन)

खराब परीक्षा परिणाम की समीक्षा होनी चाहिए। पढ़ाई में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों पर सख्ती बरतने की भी जरूरत है। सरकार को भी स्कूलों में सुविधाएं बढ़ानी होंगी। -एनएल जांगिड़, अध्यक्ष-फरीदाबाद अभिभावक एकता मंच

स्कूल आधारित परीक्षा परिणाम की समीक्षा की जाएगी। कमजोर छात्रों के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। छुट्टियों में अतिरिक्त कक्षाओं का आयोजन किया जाएगा। -मनोज कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी

अंक सुधार का मौका
इस रिजल्ट के आधार पर जिन परीक्षार्थियों को अंक सुधार या उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच करानी है वे ऑनलाईन आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा परिणाम घोषित होने के 20 दिन तक आवेदन किया जा सकता है।

ऐसे गिर रहा रिजल्ट
साल        प्रतिशत
2014    66.51 
2015    46.04
2016    43.91

जिले में शिक्षकों के पद रिक्त
श्रेणी           पद         रिक्त
जेबीटी         1875      934
सी एंड वी     589        113
मास्टर        730         126
लेक्चरर्स      459         120
हेड मास्टर    39           32
प्रिंसिपल      50            3
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