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Petrol-Diesel Price Impact: दाल से लेकर ढुलाई तक सब महंगा, चना-अरहर के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा रसोई का बजट

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 27 May 2026 06:15 AM IST

सार

देश में चना और अरहर दाल के दाम बढ़ने की आशंका है। कम आयात, कमजोर आवक और अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून की चिंता ने बाजार में महंगाई बढ़ा दी है। डीजल-पेट्रोल महंगा होने से माल ढुलाई खर्च भी 10 से 15 फीसदी बढ़ गया है। टायर और वाहन पुर्जों की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्ट और महंगा हो सकता है। आइए, विस्तार से जानते हैं कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से और किन चीजों के दाम में बढ़ोतरी हुई है...
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आम आदमी पर महंगाई की चौतरफा मार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और अब इसका असर सीधे आम आदमी की रसोई पर दिखाई देने लगा है। आने वाले दिनों में चना और अरहर दाल के दाम और बढ़ सकते हैं। वहीं डीजल-पेट्रोल की महंगाई और माल ढुलाई खर्च बढ़ने से खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगे होने की आशंका है। अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून की चिंता ने भी बाजार का तनाव बढ़ा दिया है। ऐसे में आम लोगों का घरेलू बजट और बिगड़ सकता है।
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आखिर दालों के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
इंडिया पल्सेज एंड ग्रेंस एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में चना और अरहर की आवक कम हो रही है। वहीं विदेशों से आयात भी घटा है। इसी वजह से बाजार में इन दालों के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि बीते वित्त वर्ष में कुल दाल आयात घटकर 57.76 लाख टन रह गया, जबकि इससे पहले यह 69.3 लाख टन था। चने का आयात करीब पांच लाख टन घट गया। मसूर और मटर के आयात में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई। बाजार विशेषज्ञ राहुल चौहान के मुताबिक, अगर मौसम खराब रहा और उर्वरकों की कमी बनी रही तो आने वाले महीनों में दालों की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

किन दालों में कितना बढ़ा भाव?
पिछले एक महीने में कई दालों के दाम तेजी से बढ़े हैं। अरहर, मसूर, उड़द और देसी चना सभी महंगे हुए हैं। मंडियों में पुरानी अरहर का स्टॉक भी काफी कम बचा है। सरकार ने अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 8450 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जिससे बाजार में तेजी का माहौल और मजबूत हुआ है।
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दाल

25 अप्रैल

25 मई

बढ़ोतरी

तुअर (सोलापुर)

7800

8050

250 रुपये

मसूर (बीना)

6350

6600

250 रुपये

पीली मटर

4200

4500

300 रुपये

उड़द

7950

8250

300 रुपये

देसी चना

5300

5650

350 रुपये


अल-नीनो और मानसून की चिंता क्यों बढ़ी?
मौसम को लेकर भी चिंता बढ़ती जा रही है। अल-नीनो के असर से इस बार सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई जा रही है। अगर मानसून कमजोर रहा, तो खरीफ सीजन में अरहर जैसी फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इससे उत्पादन घटेगा और बाजार में कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश कम होने का असर सिर्फ दालों पर नहीं, बल्कि सब्जियों और दूसरी कृषि उपज पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि बाजार अभी से महंगाई के नए दौर की आशंका जता रहा है।

माल ढुलाई महंगी होने से क्या असर पड़ेगा?
डीजल की किल्लत और ईंधन की बढ़ती कीमतों ने ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी दबाव बढ़ा दिया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मुताबिक, कई राज्यों में करीब 20 फीसदी ट्रक सड़कों से हट गए हैं। इससे माल ढुलाई की लागत 10 से 15 फीसदी तक बढ़ गई है। इसका सीधा असर खाने-पीने के सामान, किराना और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है। यानी अब सिर्फ दाल ही नहीं, बल्कि बाजार की कई चीजें आम लोगों के लिए और महंगी हो सकती हैं।

टायर और वाहन पुर्जों की कीमतें क्यों बढ़ रहीं?
महंगाई का असर ऑटो सेक्टर पर भी दिख रहा है। टायर और वाहन पुर्जा बनाने वाली कंपनियों ने भी कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं। कंपनियों का कहना है कि कच्चे माल और ऊर्जा की लागत लगातार बढ़ रही है। सिएट के प्रबंध निदेशक अर्णव बनर्जी ने बताया कि कंपनी मार्च और अप्रैल में टायरों के दाम करीब पांच फीसदी बढ़ा चुकी है और मई-जून में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे ट्रांसपोर्ट का खर्च और बढ़ेगा, जिसका असर आखिरकार आम लोगों की जेब पर ही पड़ेगा।
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